धातुओं का शहरी खनन, पुनर्चक्रण एवं संसाधन सुरक्षा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आज
Date : 07 Sep 2026
यह कार्यशाला सतत एवं विश्वसनीय संसाधन प्रबंधन के संबंध में विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। इसमें धातुओं तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर स्थित मल्टी-एक्टिविटी सेंटर में आयोजित होगा। इसमें पर्यावरण क्षेत्र के अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, तकनीकी विशेषज्ञ तथा अन्य संबंधित हितधारक सहभागिता करेंगे।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य धातुओं के क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, शहरी खनन एवं पुनर्चक्रण की संभावनाओं का आकलन करना तथा संसाधन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक उपायों की पहचान करना है। विचार-विमर्श के प्रमुख विषयों में धातुओं का जीवन-चक्र मूल्यांकन, तकनीकी-आर्थिक पहलू, पर्यावरणीय प्रबंधन तथा विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) शामिल होंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण के साथ होगा, जिसके पश्चात पारंपरिक दीप प्रज्वलन किया जाएगा। उद्घाटन सत्र को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की प्रादेशिक अधिकारी श्रीमती हेमा देशपांडे, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पुणे क्षेत्रीय निदेशक श्री प्रतीक भरणे, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नागपुर स्थित एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक श्री सेंथिल कुमार, भा.व.से., तथा विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) प्रेमलाल पटेल संबोधित करेंगे।
तकनीकी सत्र में विभिन्न संस्थानों के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी। जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र के वैज्ञानिक श्री कोला इमैनुएल राजू धातुओं के संदर्भ में चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के डॉ. अमृत अगस्ती धातु पुनर्चक्रण में नवीन प्रौद्योगिकियों पर चर्चा करेंगे। डॉ. कार्तिक बालासुंदरम धातुओं के जीवन-चक्र मूल्यांकन एवं पर्यावरणीय प्रबंधन के विषय पर प्रकाश डालेंगे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली की श्रीमती अनामिका सागर धातुओं के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) से संबंधित विषयों पर जानकारी साझा करेंगी। कार्यशाला का समापन संवादात्मक सत्र के पश्चात धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा।
कार्यशाला से पूर्व अपने संबोधन में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की प्रादेशिक अधिकारी श्रीमती हेमा देशपांडे ने जिम्मेदार धातु प्रबंधन के पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धातुओं का अनुचित निपटान पर्यावरण के तीनों प्रमुख घटकों—जल, वायु एवं भूमि—पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने अलौह धातुओं के चक्रीय उपयोग के संबंध में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने तथा शहरी खनन एवं पुनर्चक्रण से उपलब्ध अवसरों का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि शहरी खनन एवं पुनर्चक्रण अपशिष्ट को रणनीतिक संसाधन में परिवर्तित करने की क्षमता रखते हैं। इससे पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के साथ-साथ दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा, औद्योगिक सुदृढ़ता तथा आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने संबंधित हितधारकों एवं इच्छुक प्रतिभागियों से कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाने तथा धातुओं के चक्रीय उपयोग को बढ़ावा देने से संबंधित विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से योगदान देने का आह्वान किया।
श्रीमती देशपांडे ने यह भी जानकारी दी कि विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 का आयोजन 15 से 18 सितंबर 2026 तक गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में किया जाएगा। इस वर्ष मंच की मुख्य विषय-वस्तु “जनता एवं समृद्धि के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण” है। इस मंच का आयोजन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सिट्रा फिनलैंड तथा गुजरात सरकार के सहयोग से किया जा रहा है।
यह कार्यशाला सतत धातु प्रबंधन, संसाधन दक्षता तथा अधिक सुदृढ़ और चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में संक्रमण से संबंधित ज्ञान के आदान-प्रदान एवं विभिन्न हितधारकों की सहभागिता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में अपेक्षित है।